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Dr. Shamim Sharma is honored by Bhasha Samman Award of National Sahitya Akademi, New Delhi

Bhasha-Samman-Award-of-National-Sahitya-AkademiIn a grand ceremony organized by the Central Sahitya Akademi at Ravindra Bhawan, Delhi, Dr. Shamim Sharma was given the ‘Language Award’ award for his unprecedented contribution in Haryana.

केंद्रीय साहित्य अकादमी द्वारा दिल्ली स्थित रविन्द्र भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में डॉ. शमीम शर्मा को हरियाणवी भाषा में अभूतपूर्व योगदान हेतु ‘भाषा सम्मान’ पुरस्कार प्रदान किया गया। अकादमी अध्यक्ष चन्द्रषेखर कांबरा द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौषिक और सचिव श्रीनिवास राव भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि साल 2018 के लिये हरियाणवी भाषा में योगदान हेतु पहली बार डॉ. शमीम शर्मा और हरिकृश्ण द्विवेदी को संयुक्त रूप से ‘ भाषा सम्मान’ दिया गया है जिसमें एक लाख रूपये की राशि, शॉल और ताम्रपत्र पर अंकित स्मृति चिन्ह शामिल है। इस अवसर पर दिल्ली एवं अन्य राज्यों से अनेक साहित्यकार एवं समीक्षक उपस्थित थे।

पुरस्कार प्रदान कर डॉ. शमीम शर्मा ने अपना सम्मान अपने पिता श्री पूरन मुद्गल को अर्पित करते हुये कहा कि उन्हीं की प्रेरणा स्वरूप वे साहित्य में कार्यरत हैं। शमीम शर्मा ने हरियाणा एन्साइक्लोपीडिया के दस खंडों के सम्पादन और हरियाणवी संस्कृति आधारित लेखों के साथ-साथ हरियाणवी हास्य की छह कृतियों का प्रकाषन भी करवाया है। हंसीठट्ठों और मखौल के क्षेत्र में डॉ. शमीम शर्मा के कार्य को देखकर खुषवंत सिंह और राजबीर देसवाल ने कहा था कि डॉ. शमीम शर्मा ने मर्दों के क्षेत्र में कदम रखकर चुनौती दी है क्योंकि ठहाकों पर पुरुशों का वर्चस्व है। डॉ. शमीम शर्मा की अवधारणा है कि हंसी का कोई लिंग नहीं होता। वे चाहती हैं कि महिलायें भी ठहाके लगायें।

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