Sangeta Nehra in JCDV sirsa

One-day Seminar on Spiritual Science and Overall Health – JCD Vidyapeeth

जेसीडी विद्यापीठ में आध्यात्मिक विज्ञान व संपूर्ण स्वास्थ्य पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन
जीवन में आने वाली शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक चुनौतियों पर खरा उतरना ही वास्तविक स्वास्थ्य : डॉ. संगीता नेहरा

सिरसा 24 अगस्त, 2020 : जेसीडी विद्यापीठ में स्थापित शिक्षण महाविद्यालय व मेमोरियल कॉलेज के संयुक्त त्तवावधान में Óआध्यात्मिक विज्ञान और संपूर्ण स्वास्थ्यÓ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर हरियाणा सरकार के आयुष विभाग की निदेशक डॉ. संगीता नेहरा नेे शिरकत की।  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जेसीडी विद्यापीठ की प्रबंध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा द्वारा की गई। इस मौके पर जेसीडी डेन्टल के निदेशक डॉ. राजेश्वर चावला, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश,  डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. राजेन्द्र कुमार, डॉ. अनुपमा सेतिया व विद्यापीठ के रजिस्ट्रार श्री सुधांशु गुप्ता सहित अनेक अधिकारीगण, स्टॉफ सदस्य एवं गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश नेे मुख्य वक्ता डॉ. संगीता नेहरा व प्रबंध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा का हार्दिक अभिनंदन किया व डॉ संगीता नेहरा का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान में समय-समय पर विशेषज्ञों से विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों को रूबरू करवाया जाता है ताकि उन्हें नवीनतम जानकारी हासिल हो सके। उन्होंने कहा कि हर मानव की इच्छा स्वयं से और पर्यावरण से समरस होकर जीवित रहने की है, तथापि आधुनिक युग में अधिक शारीरिक और भावात्मक इच्छायें लगातार जीवन के अनेक क्षेत्रों पर भारी हो रही हैं। परिणामत: अधिकाधिक व्यक्ति खिंचाव, चिंता, अनिद्रा जैसे शारीरिक और मानसिक तनावों से पीडि़त रहते हैं और शारीरिक सक्रियता और उचित व्यायाम में एक असंतुलन बन गया है। यही कारण है कि स्वस्थ बने रहने और उसमें सुधार के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक समरसता बनाए रखने के लिए नई-नई विधियों और तकनीकों व दैनिक जीवन में योग का महत्व बढ़ गया है।

मुख्य वक्ता व अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में डॉ. संगीता नेहरा ने कहा कि आध्यात्मिकता यह है कि यह ईश्वरीय उद्दीपन की अनुभूति प्राप्त करने का एक दृष्टिकोण है, जो धर्म से अलग है। यह एक आंतरिक मार्ग जो एक व्यक्ति को उसके अस्तित्व के सार की खोज में सक्षम बनाता है या फिर गहनतम मूल्य और अर्थ जिसके साथ लोग जीते हैं। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक होने का अर्थ है कि व्यक्ति अपने अनुभव के धरातल पर यह जानता है कि वह स्वयं अपने आनंद का स्रोत है। आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होने के लिए हमें अपने भीतर झांकना होगा तथा स्वयं को पहचानना होगा तभी हम इस ओर जा सकते हैं। डॉ. नेहरा ने अनेक ऋषियों-मुनियों द्वारा बताए ज्ञान के बारे में बताया कि ‘शून्य में विराट समाया है और विराट में शून्य’।  अपने आपको स्वस्थ कहने का यह अर्थ होता है कि हम अपने जीवन में आनेवाली सभी सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का प्रबंधन करने में सफलतापूर्वक सक्षम हों। वैसे तो आज के समय मे अपने आपको स्वस्थ रखने के ढेर सारी आधुनिक तकनीक मौजूद हो चुकी हैं, लेकिन ये सारी उतनी अधिक कारगर नहीं हैं। हम अपने जीवन को कोई अर्थ प्रदान करना चाहते है तो हमें स्वास्थ्य के इन विभिन्न आयामों को एक साथ फिट करना पडेगा। वास्तव में, अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना समग्र स्वास्थ्य का नाम है जिसमें शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, बौद्धिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्वास्थ्य भी शामिल है। हमारा अच्छा स्वास्थ्य आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ हुए बिना अधूरा है। जीवन के अर्थ और उद्देश्य की तलाश करना हमें आध्यात्मिक बनाता है। आध्यात्मिक स्वास्थ्य हमारे निजी मान्यताओं और मूल्यों को दर्शाता है। अच्छे आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने का कोई निर्धारित तरीका नहीं है। यह हमारे अस्तित्व की समझ के बारे में अपने अंदर गहराई से देखने का एक तरीका है।

जेसीडी विद्यापीठ की प्रबंध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा ने अपने धन्यवादी अभिभाषण में मुख्य वक्ता डॉ संगीता नेहरा एवं अन्य अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि शारीरिक फिटनेस स्वस्थ होने का एकमात्र आधार नहीं है, स्वस्थ होने का मतलब मानसिक और भावनात्मक रूप से फिट होना है। स्वस्थ रहना आपकी समग्र जीवन शैली का हिस्सा होना चाहिए। एक स्वस्थ जीवन शैली जीने से पुरानी बीमारियों और दीर्घकालिक बीमारियों को रोकने में मदद मिल सकती है। अपने बारे में अच्छा महसूस करना और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना आपके आत्म-सम्मान और आत्म-छवि के लिए महत्वपूर्ण है। अपने शरीर के लिए जो सही है उसे करके स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखें। आप बहुत सारे व्यायाम कर सकते हैं, लेकिन उचित पोषण के बिना यह सब अप्रभावी हो जाएगा शरीर और स्वास्थ्य को स्थिर, सुदृढ़ और उत्तम बनाये रखने के लिए आहार, स्वप्न (निद्रा) और ब्रह्मचर्य- ये तीन उपस्तम्भ हैं। ‘उपÓ यानी सहायक और ‘स्तम्भÓ यानी खम्भा। इन तीनों उप स्तम्भों का यथा विधि सेवन करने से ही शरीर और स्वास्थ्य की रक्षा होती है।

इस मौके पर कार्यक्रम का सफलतम मंच संचालन डॉ. राजेन्द्र कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न प्रदान करके सम्मानित किया गया। इस मौके पर जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय एवं मैमोरियल कॉलेज का समूचा स्टाफ व अन्य अतिथिगण भी मौजूद रहे।