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Function on the Eve of Teachers Day – JCD Vidyapeeth, Sirsa
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  • September 2, 2019
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Function on the Eve of Teachers Day – JCD Vidyapeeth, Sirsa


जेसीडी विद्यापीठ में ‘शिक्षक सम्मान पर्व’ का आयोजन
अध्यापक का जीवन एक मशाल के समान जो खुद जलकर दूसरों को देता है प्रकाश : धनपत सिंह

जेसीडी विद्यापीठ के सभागार में अध्यापन कार्य में अपना विशेष योगदान प्रदान करने वाले पांच शिक्षाविदों को सम्मानित करने हेतु ‘शिक्षक सम्मान पर्व’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री धनपत सिंह बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए तथा दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ.अशोक मित्तल द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता की गई। वहीं इस मौके पर सिरसा की अतिरिक्त उपायुक्त मनदीप कौर ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। इस मौके पर जेसीडी विद्यापीठ की प्रबन्ध निदेशक डॉ.शमीम शर्मा ने सर्वप्रथम सभी अतिथियों एवं अध्यापकों का हार्दिक अभिनन्दन एवं स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरूआत कबीर रचित गुरुभक्ति दोहों के गायन एवं शब्दगीतों की प्रस्तुति द्वारा हुई। वहीं इस अवसर पर दो साहित्यकार डॉ.शमीम शर्मा की पुस्तक ‘मंगलसूत्र और मैडल’ एवं भारत भूषण प्रधान की पुस्तक ‘अनपेड डेपथज़’का विमोचन एवं समीक्षा की गई, जिसमें पुस्तकों की समीक्षा डॉ.अशोक मित्तल, डॉ.पंकज शर्मा, डॉ.सुरीन एवं सुश्री मंशा द्वारा की गई। कार्यक्रम में विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी श्री राजेश बाबा व उनके सहयोगी इस मौके पर विशेष रूप से उपस्थित हुए।

इस मौके पर प्रबन्ध निदेशक डॉ.शमीम शर्मा ने सभी अध्यापकों को प्रेरित किया कि वे अपने आचरण से छात्रों के हृदय में एक महत्वपूर्ण व अमिट स्थान बनाएं और उनके सामने आदर्श नागरिक का उदाहरण प्रस्तुत करें। डॉ.शर्मा ने कहा कि छात्र वहीं आचरण अपनाने का प्रयास करते हैं जो उनके गुरु द्वारा अपनाया जाता है, इसलिए एक अध्यापक को अपने जीवन में सदैव सद्गुणों का समावेश करना चाहिए ताकि विद्यार्थी उनके सदाचरण का अनुसरण कर सके। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए एक छायायुक्त वट वृक्ष के समान होता है इसीलिए उन्हें अपने ज्ञान की जड़ों को मजबूत बनाना चाहिए ताकि उनकी छाया अधिक से अधिक छात्रों को लाभान्वित कर सके।

बतौर मुख्यातिथि श्री धनपत सिंह ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों एवं अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों के सम्पूर्ण व्यक्तिव निर्माण व विकास में अध्यापक वर्ग की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि अध्यापक का जीवन एक जलती हुई मशाल की तरह होता है जो खुद जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, इसलिए अध्यापक को पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व का निर्वाह करना चाहिए और छात्रों को बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा देनी चाहिए। उन्होंने बेटियों के प्रति समाज को अपनी सोच बदलकर उन्हें बेहतर शिक्षा एवं उचित सम्मान देने की भी बात कही।

इस कार्यक्रम में हिसार, सिरसा, रोहतक एवं दिल्ली के जाने-माने एवं समाज हित एवं शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वालों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया, जिनमें पूर्व शिक्षा अधिकारी श्री राम सिंह, अमरीका की यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ.मनमोहन शर्मा, एमडीयू रोहतक के पूर्व प्रोफेसर डॉ.रविन्द्र विनायक एवं पूर्व प्रोफेसर डॉ.हीरक ज्योति घोष राय शामिल हैं।

इस मौके पर डॉ.हीरक ज्योति घोष राय ने अपने वक्तव्य में कहा कि जीवन में किसी भी चीज का मोल चुकाया जा सकता है, किसी भी कर्ज को उतारा जा सकता है परंतु एक योग्य, अनुभवी शिक्षक के ज्ञान का और हमारे जीवन पर उसके प्रभाव का मूल्य कभी भी नहीं चुकाया जा सकता है क्योंकि वह अनमोल है।

डॉ.रविन्द्र विनायक ने अध्यापक की महत्ता बताते हुए कहा कि जब जीवन के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, जब हर जगह से निराशा, दु:ख व असमंजस के बादल मंडराते नजर आते हैं तो उस समय जो हाथ आगे बढ़ता है, जो रोशनी की किरण नजर आती है वास्तव में वही गुरु वही शिक्षक तथा जीवनदायिनी लौ कहलाती है इसीलिए एक शिक्षक की महत्ता बढ़ जाती है।

अपने संबोधन में श्री राम सिंह ने कहा कि एक शिक्षक में वो क्षमता होती है जो साधारण से पत्थर को तराशकर उसे एक बहुमूल्य हीरा बना सकता है। उन्होंने कहा कि छात्र तो कच्ची मिट्टी के समान होता हैं, उन्हें किस रूप, रंग व आकार में ढलना है, उन्हें जीवन में किस मुकाम पर पहुंचाना है, यह सब एक योग्य शिक्षक पर ही निर्भर करता है।

डॉ.मनमोहन शर्मा ने अध्यापक की भूमिका बारे वर्णन करते हुए कहा कि गुरु शब्द का अर्थ ही, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला है। उन्होंने कहा कि एक अध्यापक अपने सदाचरण एवं ज्ञान से ही अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है।

डॉ.अशोक मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का एक शिष्य के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। उन्होंने कहा कि गूगल अपनी जगह, गुरु अपनी जगह। गुरु ही विद्यार्थी को सफल-सशक्त व्यक्तित्व में ढालता है।

इस मौके पर सभी अतिथियों एवं सिरसा के प्रबुद्धजन का कार्यक्रम के संयोजक डॉ.जयप्रकाश द्वारा अपने धन्यवादी अभिभाषण के माध्यम से आभार प्रकट किया गया। इस अवसर पर जेसीडी विद्यापीठ के विभिन्न कॉलेजों से डॉ.राजेश्वर चावला, डॉ.अरिन्दम सरकार, डॉ.कुलदीप ङ्क्षसह, डॉ.राजेन्द्र कुमार, डॉ.दिनेश गुप्ता, डॉ.अनुपमा सेतिया व श्री सुधांशु गुप्ता सहित अन्य अधिकारीगण, कर्मचारी तथा विद्यार्थीगण सहित शहर के व्योवृद्ध एवं जाने-माने साहित्यकार श्री पूरन मुद्गल, द ट्रिब्यून के वरिष्ठ पत्रकार श्री रमन मोहन के अलावा सिरसा एवं आसपास के अनेक साहित्यकार, लेखक एवं अनेक अन्य गणमान्य हस्तियां व व्यक्तिगण उपस्थित रहे।

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