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Valedictory Function of Two Days National Seminar – JCD PG College of Education, Sirsa

जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का विधिवत् समापन
विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के मध्यस्थ पुल का काम करते हैं सेमिनार:
प्रो.देवगुण

Prof. Roop Devgun, famous litterateur, attended as Chief Guest in Valedictory Function of Two Days National Seminar held at JCD PG College of Education, Sirsa. Dr. Shamim Sharma, Managing Director, JCD Vidyapeeth welcomed all the participants and guests and said that our objective is always to choose a new dimension for the students, in which this seminar will prove to be a milestone and our objective is to provide cultured, quality and excellent education among the students. #JCDV #NATIONALSEMINAR

जेसीडी विद्यापीठ में स्थापित शिक्षण महाविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को विधवित् समापन किया गया, जिसमें सिरसा के साहित्यकार प्रो.रूप देवगुण ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। वहीं इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जेसीडी विद्यापीठ की प्रबंध निदेशक डॉ.शमीम शर्मा द्वारा की गई। इस मौके पर उनके साथ जेसीडी विद्यापीठ के विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यगण डॉ.जयप्रकाश, डॉ.कुलदीप सिंह, इंजी.आर.एस.बराड़ तथा अन्य अनेक गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। इस सेमिनार के समापन अवसर पर संयोजक डॉ.राजेन्द्र कुमार ने सभी शोधार्थियों एवं इसमें पधारे सभी का आभार प्रकट करते हुए जेसीडी विद्यापीठ की प्रबन्ध निदेशक महोदया का भी पूर्ण सहयोग प्रदान करने के लिए आभार प्रकट किया। उन्होंने ने कहा कि बेहतर जानकारी रखने वाला शिक्षक ही विद्यार्थियों को बेहतर ज्ञान प्रदान कर सकता है। किसी भी विषय की नवीनतम जानकारी और आत्मविश्वास के साथ दी जाने वाली शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में काम आती है। उन्होंने कहा कि इस सेमिनार का लाभ जेसीडी के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के अलावा अन्य पधारे हुए शोधार्थियों को भी मिलेगा।

सेमिनार में जेसीडी विद्यापीठ की प्रबंध निदेशक डॉ.शमीम शर्मा ने अपने संबोधन में सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का जेसीडी विद्यापीठ में पधारने पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए सदैव नए आयाम चुनना है, जिसमें यह सेमिनार एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कारित, गुणवत्तायुक्त तथा बेहतरीन शिक्षा प्रदान करना है। डॉ.शर्मा ने कहा कि आज के युग में प्रत्येक को स्वयं को अपडेट रखना अतिआवश्यक है ताकि नवीन जानकारियों के बारे में पता रहे। आज की युवा शक्ति दुनिया में सबसे उच्च स्तर पर है, इसलिए ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना लाभदायक साबित होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का महत्व और बढ़ गया है। विद्यार्थियों को तकनीकी एवं बेहतर शिक्षा देकर ही समाज को बेहतर किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभा को पहचानने तथा प्रतिभा को निखारने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि शिक्षक को अपनी ड्यूटी नहीं बल्कि कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि प्रो.रूप देवगुण ने अपने संबोधन में जेसीडी विद्यापीठ की प्रबंधन समिति एवं कॉलेज के समूचे स्टाफ को इस सेमिनार के सफलतम आयोजन के लिए बधाई प्रेषित करते हुए कहा कि आज के आधुनिकता एवं तकनीकी युग में ऐसे आयोजन काफी सहायक सिद्ध होते हैं तथा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के मध्य यह एक पुल का काम करता है। उन्होंने कहा कि हमारी मातृभाषा हिन्दी के ज्ञान की आज के विद्यार्थियों में बहुत ही कमी होती जा रही है, जो अति चिंतनीय विषय है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एक व्यक्ति अपने जीवन में तभी सफल हो सकता है जब वह अपने काम के लिए समर्पित होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों की कक्षा में अति उत्तम माहौल को बना सकता है जिसके द्वारा हर विद्यार्थी स्वयं व शिक्षक को गौरान्वित महसूस करा सके।

इस मौके पर डॉ.जयप्रकाश ने अपने धन्यवादी अभिभाषण में मुख्यातिथि एवं अन्य अतिथियों का धन्यवाद करते हुए सभी शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं अन्य से उन्हें परिचित करवाते हुए कहा कि जेसीडी विद्यापीठ में विद्यार्थियों को इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से समय-समय पर विशेषज्ञों से रूबरू करवाकर उन्हें नवीनतम ज्ञान प्रदान करवाया जाता है ताकि वे अपडेट रह सकें।

इस समापन अवसर पर राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजक सचिव डॉ.रमेश शर्मा द्वारा जेसीडी विद्यापीठ की प्रबंध निदेशक महोदया एवं अन्य अतिथियों तथा शोधार्थियों के अलावा सिरसा के अलावा बाहर से पधारे सभी अतिथियों का धन्यवाद प्रकट किया गया। उन्होंने ने कहा कि ऐसे आयोजनों से जहां शोध में एक नया आयाम मिलता है वहीं यह शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए भी लाभदायक साबित होते हैं।

इस मौके पर कॉलेज की प्राध्यापिका श्रीमती निशा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस सेमिनार के तीन सत्र रखें गए थे, जिसमें प्रथम सत्र की अध्यक्षता चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय से पधारे डॉ.रणजीत कौर तथा सह-अध्यक्षता एसबीडीएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्या डॉ.ममता चौधरी द्वारा की गई। वहीं द्वितीय सत्र की अध्यक्षता एम.पी.केन्द्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा से पधारे डॉ.शमशेर सिंह, डॉ.अमित सांगवान तथा सहायक प्रो.केन्द्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के डॉ.शंकर लाल बीका द्वारा किया गया तथा तृतीय तकनीकी सत्र की चौ.देवीलाल विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रो.डॉ.सुलतान सिंह ढ़ांढ़ा व सह-अध्यक्षता शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ.राज कुमार द्वारा की गई। डॉ.सुलतान सिंह ढ़ांढ़ा ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि शोध कार्य का समाज कल्याण के लिए उपयोगी होना बहुत ही आवश्यक है। डॉ. राज कुमार ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि शोध कार्य में गुणात्मक शोध को महत्व देना चाहिए। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों मि.जोगिंद्र, प्रेमलता यादव, डॉ.सपना, अजय, संगीता खुराना, वैभव शर्मा इत्यादि ने संगोष्ठी के विषय पर आधारित अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस मौके पर आईसीटी के तकनीकी के अध्यक्ष डॉ शमशेर सिंह आजकल शिक्षा में उपयोग की जा रही कुछ तकनीकों जैसे मिश्रित शिक्षण, सहकर्मी ट्यूशन, फ्लिप शिक्षण, राउंड रॉबिन ब्रेनस्टॉर्मिंग, चाय पे चरचा और सून के बारे में बताया। चेयरपर्सन ने तब इन तकनीकी सत्रों का सार और निष्कर्ष निकाला।

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में 300 प्रतिभागीयों ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किए जिसमें ये अपने शोध पत्रों कें माध्यम से दो दिन तक शिक्षा व शिक्षक पर चिंतन एवं मनन किया गया

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