Main Stage Chief Guest and other guests (1)

Youth Festival Second Day – JCD Vidyapeeth, Sirsa – Dt. 12.11.2019

8वें विश्वविद्यालय युवा महोत्सव के दूसरे दिन सभी विद्यार्थियों ने बिखेरा अपनी-अपनी कला का जादू
हरियाणवीं संस्कृति की केवल भारत ही नहीं अपितु है विश्वभर में पहचान : डॉ. विष्णु भगवान

सिरसा 12 नवम्बर, 2019: जेसीडी मैमोरियल कॉलेज द्वारा आयोजित तथा चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के युवा कल्याण निदेशालय द्वारा प्रायोजित 8वाँ युवा महोत्सव के दूसरे दिन मुख्य मंच के कार्यक्रमों का शुभारंभ बतौर मुख्यातिथि चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजिज डॉ. विष्णु भगवान द्वारा किया गया। वहीं द्वितीय मंच के कार्यक्रमों का शुभारंभ बतौर मुख्यातिथि सिरसा के जिला वन अधिकारी श्री राम कुमार जांगड़ा द्वारा तथा तृतीय मंच पर चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के इकोनोमिक्स के विभागाध्यक्ष डॉ. अभय गोदारा द्वारा बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके अलावा उनके साथ विशेष रूप से चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय डीन यूथ वेल्फेयर डॉ. सुरेन्द्र कुण्डू, सहायक निदेशक डॉ. राजेश चिकारा के अलावा जेसीडी विद्यापीठ के विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यगण, अधिकारीगण एवं शहर की अनेक गणमान्य एवं विशेष हस्तियां भी मौजूद रही। इस मौके पर रेडियो कलाकार व चुटकला सम्राट भाई आजाद सिंह दुहन ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से सभी को हंसा-हंसाकर लोट-पोट करते हुए हरियाणवी बोली व अन्य सभ्याचार की बातों बारे विद्यार्थियों को अवगत करवाया।

युवा महोत्सव के दूसरे दिन मुख्य मंच पर कव्वाली, मिमिक्री, जनरल फॉक सांग, हरियाणवी पॉप सांग, हरियाणवी ऑरकेस्ट्रा तथा द्वितीय मंच पर वन एकट प्ले, हरियाणवी ग्रुप सांग, क्लासिकल डांस, वेस्टर्न गु्रप सांग तथा तृतीय मंच पर वेस्टर्न वोकल सोलो, हरियाणवी फॉक सांग, क्लासिकल वोकल सोलो, लाईट वोकल भजन-शब्द इत्यादि कार्यक्रमों हेतु विद्यार्थियों द्वारा अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दी गई, जिसमें कव्वाली में टीम नं.1932 में ‘उजाड़ी हुई रतन के मंजरÓ प्रस्तुत किया और दर्शकों का मनोरंजन किया। टीम नं.1929 के छात्रों द्वारा प्रस्तुत कव्वाली ‘अछा बोली बहोत हैÓ तथा टीम नं. 1923, टीम नं. 1929 एवं टीम नं. 1931 व टीम नं. 1943 की प्रस्तुति को दर्शकों से बहुत सराहना मिली। हरियाणवी लोक गीत की श्रेणी में ‘बहगट सिंह कद जीÓ ने देशभक्ति की भावनाओं से दर्शकों का दिल भर दिया। दहेज प्रथा और ग्राम जीवन पर आधारित लोक गीतों को न्यायाधीशों से भी बहुत सराहना मिली। वेस्टर्न वोकल (सोलो) की श्रेणी में ‘मैं चाहता हूं कि आप मेरे साथ अपना जीवन बिताएंÓ ‘मेरी आंखों में देखोÓ, ‘चलो, आओÓ और ‘मुझे लगता हैÓ प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत किए गए थे। वन एक्ट प्ले की श्रेणी में, ब्रेन वॉश और माँ के बलिदानों पर आधारित प्रदर्शनों ने दर्शकों को इन मुद्दों पर सोचने के लिए मजबूर किया।

सर्वप्रथम कार्यक्रम के समन्वयक एवं मैमोरियल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश ने मुख्यातिथि एवं सभी अतिथियों और न्यायाधीशों के अलावा विभिन्न कॉलेजों से आए हुए विद्यार्थियों एवं उनके प्राचार्यों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय के युवा महोत्सव के दूसरे दिन सर्वप्रथम डॉ. शमीम शर्मा के पिताश्री एवं सिरसा के महान साहित्यकार पूरन मुद्गल जी को दो मिनट का मौन धारण करके श्रद्धांजलि दी गई। उन्होंने कहा कि यह केवल युवाओं का कार्यक्रम है तथा इसमें आने वाला प्रत्येक भी इनका जोश एवं जज्बा देखकर खुद को ऊर्जावान एवं युवा महसूस करता है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि हम प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें तथा किसी को भी कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े।

मुख्यातिथि डॉ. विष्णु भगवान ने सर्वप्रथम इस कार्यक्रम के आयोजकों को बधाई प्रेषित करते हुए कहा कि जेसीडी विद्यापीठ में आयोजित इस कार्यक्रम में अनुशासन को देखकर मन प्रफुल्लित हो उठा है। उन्होंने इस मौके पर युवाओं को अपनी ऊर्जा को सही दिशा में इस्तेमाल करने हेतु रामायण एवं महाभारत से जटायु एवं भीष्म पितामह का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने हौंसले को बुलंद करके सफलता हेतु आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। डॉ. विष्णु भगवान ने कहा कि हमें कभी भी अपने लक्ष्य से विचलित न होकर उसी दिशा में लग्र एव मेहनत से कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणवी संस्कृति ऐसी है जो केवल भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में अपना डंका बजा चुकी है तथा अपनी एक अलग पहचान कायम कर चुकी है।

इस मौके पर द्वितीय मंच के मुख्यातिथि श्री राम कुमार जांगड़ा ने जेसीडी विद्यापीठ में व्याप्त अनुशासन एवं हरे-भरे कैम्पस की सराहना करते हुए कहा कि इस युवा महोत्सव के थीम आओ इस धरा को रहने योग्य को रहने लायक बनाएं को यह कार्यक्रम बखूबी चरितार्थ कर रहा है क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रस्तुति कोई न कोई संदेश दे रही चाहे वह सामाजिक बुराईयों का हो या प्रकृति को बचाने का। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उसे पेड़ बनाकर अपने प्रकृति के प्रति कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए।
इस मौके पर डॉ. हुकुम चंद, डॉ. रवि गौतम, डॉ. रमा कांता, डॉ. रामपाल, डॉ. अजीत, डॉ. आज़ाद सिंह और डॉ. राम सिंह यादव द्वारा निर्णायक मण्डल के तौर पर अपने निर्णय को सुरक्षित रखा गया। इस अवसर पर जेसीडी विद्यापीठ के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्य, स्टाफ सदस्य, चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय से सम्बद्ध समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, विद्यार्थीगण एवं अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।