Follow us:-
  • By
  • March 2, 2017
  • No Comments

Inaugural Function of National Seminar – 02/03/2017


सृजनात्मक सोच ही एक सच्चा शोध कार्य – डॉ. एम.पी.एस. इशर
जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय में शिक्षा में शोध विषय पर आयोजित हुआ राष्ट्रीय सेमिनार

सिरसा 02 मॉर्च, 2017 : जेसीडी विद्यापीठ में स्थापित शिक्षण महाविद्यालय द्वारा विगत दिवस शिक्षा में शोध विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें बठिंडा में स्थापित महाराजा रणजीत सिंह राज्य तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मोहन पाल सिंह इशर बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए तथा इस सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में हिसार के गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनैस के प्रो. नरेन्द्र कुमार बिश्रोई ने शिरकत की। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि एवं मुख्य वक्ता के अलावा विद्यापीठ के प्रबंधन समन्वयक इंजी. आकाश चावला, शैक्षणिक निदेशक डॉ. आर.आर. मलिक, रजिस्ट्रार श्री सुधांशु गुप्ता एवं जेसीडी विद्यापीठ के विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यगणों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके तथा सरस्वती वंदना के साथ किया गया।

सर्वप्रथम जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश द्वारा मुख्यातिथि महोदय एवं अन्य अतिथियों तथा शोधार्थियों का स्वागत करते हुए इस सेमिनार के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई तथा इसके आयोजन से सम्बन्धित उद्देश्यों से भी सभी को अवगत करवाया।

इस अवसर पर सर्वप्रथम जेसीडी विद्यापीठ के शैक्षणिक निदेशक डॉ. आर.आर. मलिक ने अपने संबोधन में सर्वप्रथम आए हुए अतिथियों का स्वागत किया तथा मुख्यातिथि महोदय एवं अन्य का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने कहा कि एक सही दिशा-निर्देशन ही वास्तव में शोधकार्य में अह्म भूमिका अदा करती है। आज समाज की आवश्यकता नई-नई खोज की है जो हमारे समाज को सही दिशा प्रदान करती है। शोधकार्य ही जीवन का आधार है। डॉ. मलिक ने सभी शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को विश्वास दिलाया कि निकट भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से अनेक विशेषज्ञों एवं शोध में बेहतर कार्य करने वाले विशेषज्ञों एवं शिक्षकों को संस्थान में आमंत्रित करके विद्यार्थियों को मुखातिब करवाया जाएगा ताकि उनकी शोधकार्य में रूचि बढ़े तथा वे सफलता प्राप्त कर सकें।

सेमिनार में मुख्य वक्ता उपस्थित हुए प्रो. एन.के. बिश्रोई ने अपने संबोधन में कहा कि वैज्ञानिक शोधकार्य वर्तमान में विज्ञान के साथ ही सम्बन्धित नहीं है बल्कि यह अन्य क्षेत्रों जैसे शिक्षा, वाणिज्य, प्रबंधन, तकनीकी इत्यादि से भी पूर्ण रूप से जुड़ा हुआ है तथा शोध कार्य में आंकड़ों का विशेष महत्व होता है। जब भी हम जो आंकड़े शोध कार्य में शामिल करें वे पूर्ण रूप से सत्यापित होने चाहिए कल्पना पर आधारित आंकड़ों की अनदेखी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के क्षेत्र में शोध का विशेष महत्व होता है। हर क्षेत्र में शोध की आवश्यकता कृषि, समाज, सेना, व्यावसायिक, तकनीकी इत्यादि में सकारात्मक विचार व कुछ न कुछ नया करना ही शोध कार्य का एक भाग है। प्रत्येक व्यक्ति शोध कार्य में लगा रहता है परंतु उसका वास्तविक ज्ञान हासिल करके बेहतर करना ही सही मायनों में शोध का भाग माना जाता है।

इस सेमिनार में बतौर मुख्यातिथि अपने संबोधन में प्रो. एम.पी.एस. इशर ने सर्वप्रथम चारों तरफ हरे-भरे एवं सुशासित व प्रदूषण रहित शांत व विशाल जेसीडी विद्यापीठ कैम्पस के माहौल की भूरि-भूरि प्रश्ंसा की। उन्होंने कहा कि अनुशासन एवं स्वच्छता जो कि एक शोध कार्य का महत्वपूर्ण सोपान है वह इस विद्यापीठ की मुख्य विशेषता है, इसलिए इस संस्थान में शिक्षा हासिल करने वाले सभी विद्यार्थी सौभाग्यशाली है। उन्होंने कहा कि हमारी मूलभूत आवश्यकताओं में भी शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रो. इशर ने इस बात पर विशेष बल दिया कि शोधकार्य में मौलिकता एवं सृजनात्मकता का होना अति अनिवार्य है। ज्ञान, सम्प्रेषण, कौशल में शोध की ही जरूरत पड़ती है तथा किसी भी कार्य के प्रति अगर अच्छी एवं सृजनात्मक विचार ही एक सच्चा शोधकार्य है। हमारे ऋषि-मुनियों ने भी प्राचीन समय में नई-नई खोज की थी। एक तर्कपूर्ण विचार सदैव हमें शोधकार्य में आगे बढऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने सभी को अपने संबोधन में कहा कि हमारे सपने कभी भी मरने नहीं चाहिए हमें सदैव जागृत रहना चाहिए।

इस राष्ट्रीय सेमिनार में 300 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा हिस्सा लिया गया तथा 160 शोधपत्र तथा 140 पेपर प्रस्तुत किए गए। जिसमें सभी शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों द्वारा शोध में नवीनतम विचारों एवं बदलाव के बारे में चर्चा की गई। इस मौके पर इस सेमिनार में मंच संचालन एवं अतिथियों का आभार आयोजन सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार द्वारा किया गया। जिन्होंने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। अंत में मुख्यातिथि महोदय एवं मुख्य वक्ता को प्रशस्ति चिह्न प्रदान करके सम्मानित किया गया।