Sanitization by Legendary Tradition in JCD Vidyapeeth

जेसीडी विद्यापीठ मे पौराणिक परंपरा से किया गया सैनिटाइज
हवन सामग्री से वातारण शुद्ध होने के साथ कोरोनावायरस का संक्रमण हो जाता है कम

सिरसा 13 मई: जेसीडी विद्यापीठ में करोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के दौरान हवन कुंड सामग्री से पूरे कैंपस को सैनिटाइज किया गया जिसका शुभारंभ जेसीडी विद्यापीठ के प्रबंध निर्देशक डॉ शमीम शर्मा ने हवन कुंड में आहुति डालकर तथा इको फ्रेंडली साधन के माध्यम से चारों दिशाओं में आयुर्वेदिक सामग्री की धूनी से सैनिटाइज की शुरुआत कर के समाज में एक नया प्राकृतिक संदेश दिया है। इस मौके पर जे सी डी कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी की प्राचार्या डॉ.अनुपमा सेतिया ने भी हवन कुंड में आहुति डाली और कहा अच्छी सेहत और वातावरण की पवित्रता बनाए रखता है हवन, धुएं से होता है संजीवनी शक्ति का संचार जबकि आहुति के साथ मंत्रों का उच्चारण सहायक प्रोफेसर कोमल गोस्वामी के द्वारा किया गया ।

इस अवसर पर जेसीडी विद्यापीठ के प्रबंध निदेशक डॉ.शमीम शर्मा ने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में दिनचर्या का शुभारंभ हवन, यज्ञ, अग्निहोत्र आदि से होता था। प्रातः और सायं यज्ञ करके संसार के विविध रोगों का निवारण करते थे ।हवन के दौरान धूप, गुगुल, गाय के गोबर से बने उपले के साथ जायफल, जावत्री, लौंग, तुलसी पत्र गाय के घी, समी वृक्ष की समीधा आदि का प्रयोग किया गया। हवन-यज्ञ को धार्मिक एवं वैज्ञानिक दोनों कारणों से ही महत्वपूर्ण माना जाता है और अगर किसी कार्य की शुरूआत इस पावन कार्य से की जाए तो वह शुभ फलदायी होता है। उन्होंने साईंस के साथ इस हवन-यज्ञ को जोड़ते हुए कहा कि जहां एक ओर हवन से मानसिक शांति प्राप्त होती है वहीं उसका धुंआ सम्पूर्ण वातावरण को स्वच्छ करता है क्योंकि हवन में डाली जाने वाली सामग्री में अनेक ऐसी औषधियां निहित होती है जो वातावरण को शुद्ध एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

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